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श्वेताश्वतर • अध्याय 3 • श्लोक 12
महान्प्रभुर्वै पुरुषः सत्वस्यैष प्रवर्तकः। सुनिर्मलामिमां प्राप्तिमीशानो ज्योतिरव्ययः॥
यह आत्मन वास्तव में शक्तिशाली प्रभु है। वह अव्यय प्रकाश है जो हर चीज का नियन्ता है। वह सभी प्राणियों की बुद्धि का मार्गदर्शन करता है जिससे वे शुद्धतम स्थिति यानी मुक्ति की स्थिति को प्राप्त कर सकें।
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