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श्वेताश्वतर • अध्याय 3 • श्लोक 10
ततो यदुत्तरततं तदरूपमनामयम्‌। य एतद्विदुरमृतास्ते भवन्त्यथेतरे दुःखमेवापियन्ति॥
वह पुरुष इस विश्व से अत्यन्त परे है, अरूप है, और दुःख से रहित है। जो इसे अनुभव द्वारा जान जाते हैं वे मृत्यु से मुक्त हो जाते हैं। किन्तु अन्य सब को निःसन्देह दुःख भोगना पड़ता है।
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