प्रयास के साथ अपनी इन्द्रियों को नियंत्रण में रखते हुए प्राण के क्षीण होने पर नासिका से उच्छवास लेकर जिज्ञासु विद्वान को बिना प्रमत्त हुए मन को वश में रखना चाहिये जैसे सारथि चंचल घोड़ों को लगाम से नियन्त्रित रखता है।
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