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श्वेताश्वतर • अध्याय 2 • श्लोक 13
लघुत्वमारोग्यमलोलुपत्वं वर्णप्रसादं स्वरसौष्ठवं च। गन्धः शुभो मूत्रपुरीषमल्पं योगप्रवृत्तिं प्रथमां वदन्ति॥
कहा जाता है कि योग में प्रवेश करने से योग का पहला परिणाम यह होता है कि शरीर हलका और स्वस्थ हो जाता है, मन की लालसाएं मिट जाती हैं, शरीर का वर्ण कान्तियुक्त हो जाता है, स्वर में माधुर्य आ जाता है, शरीर से सुगंध आती है तथा शरीर का मलोत्सर्जन बहुत अल्प हो जाता है।
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