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श्वेताश्वतर • अध्याय 2 • श्लोक 11
नीहारधूमार्कानिलानलानां खद्योतविद्युत्स्फटिकशशीनाम्‌। एतानि रूपाणि पुरःसराणि ब्रह्मण्यभिव्यक्तिकराणि योगे॥
योग के अभ्यास में ब्रह्म-दर्शन के पूर्व कोहरा, धूम्र, सूर्य, वायु, अग्नि, खद्योत, बिजली, स्फटिक तथा चन्द्र दिखाई देते हैं।
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