अथवा हम ब्रह्म को ध्यान में एक नदी के रूप में देखते हैं जिसमें पाँच स्रोतों का जल है। पाँच कारणों से उसमें पाँच उग्र घुमाव हैं। इसमें पाँच प्राण रूपी लहरें हैं। उसका मन पंचविध ज्ञान का मूल उद्गम है। पंचविध दुःख इसकी क्षीप्तिकाएं हैं जिनमें पांच भंवर हैं, पांच शाखाएं और असंख्य पक्ष हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
श्वेताश्वतर के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
श्वेताश्वतर के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।