ऋषियों ने एक चक्र या पहिया देखा जिसमें एक नेमि है, तीन वृत्त हैं, सोलह सिरे या अन्त-भाग हैं, पचास अरें हैं, बीस प्रत्यरे हैं, छः अष्टक हैं, भिन्न-भिन्न रूपों का एक पाश है जिसके द्वारा तीन भिन्न-भिन्न मार्गों पर वह चालित होता है तथा उसके मोह के दो निमित्त हैं।
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