अपनी देह को अरणि बनाकर उसे प्रणव रूपी ऊपरी अरणि के साथ ध्यान की क्रिया रूपी रगड़ के अभ्यास द्वारा गूढ़ अग्नि की भांति भगवान की परम ज्योति को देखना चाहिये।
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