हे महेश्वर! मेरा पुत्र शीघ्र ही सर्वज्ञानी हो और आपके अनुग्रह का पात्र बनकर चतुर्विध मुक्ति(सायुज्य, सामीप्य, सारूप्य एवं सालोक्य) को प्राप्त हो जाए।
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