यो रहस्योपनिषदमधीते गुर्वनुग्रहात्।
सर्वपापविनिर्मुक्तः साक्षात्कैवल्यमभुते साक्षात्कैवल्यमश्नुत इत्युपनिषत्॥
जो साधकगुरु के अनुग्रह से इस रहस्योपनिषद् के तत्त्वदर्शन को जान लेता है, वह समस्त पापों से मुक्त होकर साक्षात् कैवल्य-पद को प्राप्त होता है। यही उपनिषद्(रहस्यात्मक ज्ञान) है।
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