मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शुकरहस्य • अध्याय 1 • श्लोक 51
तच्छ्रुत्वा सकलाकारं व्यासः सत्यवतीसुतः। पुत्रेण सहितः प्रीत्या परानन्दमुपेयिवान्॥
उस प्रत्युत्तर को सुनकर सत्यवती-पुत्र मुनि वेदव्यासजी ने अपने पुत्र को सम्पूर्ण जगत् में संव्याप्त जान लिया और पुत्र सहित सर्वव्यापक, अनन्तरूप परब्रह्म की प्राप्ति कर ली।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शुकरहस्य के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शुकरहस्य के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें