उस प्रत्युत्तर को सुनकर सत्यवती-पुत्रमुनि वेदव्यासजी ने अपने पुत्र को सम्पूर्ण जगत् में संव्याप्त जान लिया और पुत्र सहित सर्वव्यापक, अनन्तरूप परब्रह्म की प्राप्ति कर ली।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शुकरहस्य के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शुकरहस्य के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।