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शुकरहस्य • अध्याय 1 • श्लोक 50
अनुव्रजन्नाजुहाव पुत्रविश्लेषकातरः । प्रतिनेदुस्तदा सर्वे जगत्स्थावरजङ्गमाः॥
पुत्र के वियोग से व्याकुल श्री वेदव्यासजी उनके पीछे-पीछे चलते हुए उन्हें पुकारने लगे। उस समय उनकी पुकार का प्रत्युत्तर सम्पूर्ण जगत् के जड़ और चेतन पदार्थों ने दिया।
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