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शुकरहस्य • अध्याय 1 • श्लोक 48
उपदिष्टः शिवेनेति जगत्तन्मयतां गतः। उत्थाय प्रणिपत्येशं त्यक्ताशेषपरिग्रहः॥
भगवान् शिव के इस प्रकार के उपदेश को सुनकर मुनि शुकदेव सम्पूर्ण जगद्रूप परमेश्वर में तन्मय हो गए। तत्पश्चात् वे उठे, भगवान् को हाथ जोड़कर प्रणाम किया और समस्त परिग्रह का त्याग करके (तपोवन की ओर) प्रस्थान कर गए।
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