भगवान् शिव के इस प्रकार के उपदेश को सुनकर मुनि शुकदेव सम्पूर्ण जगद्रूप परमेश्वर में तन्मय हो गए।
तत्पश्चात् वे उठे, भगवान् को हाथ जोड़कर प्रणाम किया और समस्त परिग्रह का त्याग करके (तपोवन की ओर) प्रस्थान कर गए।
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