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शुकरहस्य • अध्याय 1 • श्लोक 45
ईश्वर उवाच- एवमुक्त्वा मुनिश्रेष्ठ रहस्योपनिषच्छुक। मया पित्रानुनीतेन व्यासेन ब्रह्मवादिना॥
भगवान् शिव ने मुनि शुकदेव से कहा— हे शुकदेव! तुम्हारे पिता वेदव्यासजी ब्रह्मज्ञानी हैं। उन्हीं पर प्रसन्न होकर मैंने तुम्हारे प्रति इस रहस्योपनिषद् का उपदेश किया है।
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