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शुकरहस्य • अध्याय 1 • श्लोक 43
अन्यविद्यापरिज्ञानमवश्यं नश्वरं भवेत्। ब्रह्मविद्यापरिज्ञानं ब्रह्मप्राप्तिकरं स्थितम्॥
अन्य विद्याओं का भली-भाँति प्राप्त किया गया ज्ञान निश्चय ही नश्वर है; किन्तु ब्रह्मविद्या का यथार्थ रूप से प्राप्त ज्ञान ब्रह्मप्राप्ति कराने में समर्थ होता है।
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