शिष्य(साधक) को पूर्ण बोध तभी प्राप्त हो सकता है, जब वह पहले गुरु से उपदेश श्रवण करे, फिर उसका मनन करे और तत्पश्चात् निदिध्यासन(अनुभूति की साधना) का अभ्यास करे।
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