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शुकरहस्य • अध्याय 1 • श्लोक 42
श्रवणं तु गुरोः पूर्वं मननं तदनन्तरम्। निदिध्यासनमित्येतत् पूर्णबोधस्य कारणम्॥
शिष्य (साधक) को पूर्ण बोध तभी प्राप्त हो सकता है, जब वह पहले गुरु से उपदेश श्रवण करे, फिर उसका मनन करे और तत्पश्चात् निदिध्यासन (अनुभूति की साधना) का अभ्यास करे।
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