यह जीवकार्यरूप उपाधि से युक्त है और ईश्वरकारणरूप उपाधि से युक्त है।
इन कार्य और कारणरूप उपाधियों का त्याग कर देने पर केवल विशुद्ध ज्ञानस्वरूप ब्रह्म ही शेष रहता है।
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