कार्य और कारण रूप दो उपाधियों के कारण ‘त्वम्’ और ‘तत्’ पदों में भेद का प्रतिपादन किया जाता है।
किन्तु उपाधिरहित होने पर दोनों ही एक सच्चिदानन्दस्वरूप हैं।
जगत् में भी ‘यह’ और ‘वह’— ये दोनों वचन (यह और वह) प्रत्येक देश और काल में प्रयुक्त होते हैं।
इनमें से ‘यह’ और ‘वह’ का भेद हटा देने पर एकमात्र ब्रह्म ही शेष रहता है। जैसे— ‘वह देवदत्त है’ और ‘यह देवदत्त है’— इन दोनों वाक्यों में देवदत्त एक ही व्यक्ति है।
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