मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शुकरहस्य • अध्याय 1 • श्लोक 37
दृश्यमानस्य सर्वस्य जगतस्तत्त्वमीर्यते । ब्रह्मशब्देन तद्ब्रह्म स्वप्रकाशात्मरूपकम्॥
इस सम्पूर्ण दृश्यमान जगत् में जो तत्त्व संव्याप्त है, उसका निरूपण ‘ब्रह्म’ शब्द द्वारा किया जाता है। वही ब्रह्म स्वयं-प्रकाशित आत्मतत्त्व के रूप में (समस्त प्राणियों में) संव्याप्त है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शुकरहस्य के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शुकरहस्य के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें