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शुकरहस्य • अध्याय 1 • श्लोक 36
स्वप्रकाशापरोक्षत्वमयमित्युक्तितो मतम्। अहंकारादिदेहान्तं प्रत्यगात्मेति गीयत॥
उस (‘अयमात्मा ब्रह्म’ महावाक्य के अन्तर्गत) स्वप्रकाशित, परोक्ष (प्रत्यक्ष शरीर से परे) तत्त्व का प्रतिपादन ‘अयं’ पद द्वारा किया गया है। अहंकार से लेकर शरीर तक को प्रत्यक् आत्मा कहा गया है।
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