उस (‘अयमात्मा ब्रह्म’ महावाक्य के अन्तर्गत)स्वप्रकाशित, परोक्ष(प्रत्यक्ष शरीर से परे)तत्त्व का प्रतिपादन ‘अयं’ पद द्वारा किया गया है।
अहंकार से लेकर शरीर तक को प्रत्यक् आत्मा कहा गया है।
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