मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शुकरहस्य • अध्याय 1 • श्लोक 32
परिपूर्णः परात्मास्मिन्देहे विद्याधिकारिणि। बुद्धेः साक्षितया स्थित्वा स्फुरन्नहमितीर्यते॥
यह मानव शरीर ही परिपूर्ण ब्रह्मविद्या की प्राप्ति का अधिकारी है। इस शरीर में साक्षिरूप से अवस्थित परमात्म-बुद्धि के स्फुरित होने पर उसे ‘अहं’ कहा जाता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शुकरहस्य के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शुकरहस्य के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें