चतुर्मुख ब्रह्मा, इन्द्रदेव, समस्त देवताओं, मनुष्यों, अश्वों, गौओं तथा अन्य सभी प्राणियों में एक ही चैतन्य सत्ता— ब्रह्म अवस्थित है। वही प्रज्ञान-ब्रह्म मुझमें भी विद्यमान है।
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