मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शुकरहस्य • अध्याय 1 • श्लोक 25
जीवत्वं सर्वभूतानां सर्वत्राखण्डविग्रहम्। चित्ताहंकारयन्तारं जीवाख्यं त्वं पदं भजे॥
आप सभी प्राणियों में जीवस्वरूप हैं, सर्वत्र अखण्ड विग्रह के रूप में स्थित हैं तथा हमारे चित्त और अहंकार को नियंत्रित करने वाले हैं। हम जीवस्वरूप त्वम्-पद (‘तत्त्वमसि’ महावाक्य के अन्तर्गत) की स्तुति करते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शुकरहस्य के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शुकरहस्य के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें