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शुकरहस्य • अध्याय 1 • श्लोक 18
वाक्यार्थस्य विचारेण यदाप्नोति शरच्छतम्। एकवारजपेनैव ऋष्यादिध्यानतश्च यत्॥
महावाक्यों के अर्थों पर सौ शरद् ऋतुओं (वर्षों) तक विचार करने से जिस फल की प्राप्ति होती है, वही फल इन वाक्यों का ऋष्यादि के स्मरण सहित एक बार जप करने से ही प्राप्त हो जाता है।
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