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शुकरहस्य • अध्याय 1 • श्लोक 15
अङ्गहीनानि वाक्यानि गुरुर्नोपदिशेत्पुनः। सषडङ्गान्युपदिशेन्महावाक्यानि कृत्स्नशः॥
उचित यही है कि गुरु के द्वारा अङ्गहीन वाक्यों का उपदेश नहीं किया जाना चाहिए; अपितु सभी महावाक्यों का षडङ्ग सहित उपदेश करना चाहिए।
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