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शुकरहस्य • अध्याय 1 • श्लोक 13
श्रीसदाशिव उवाच- साधु साधु महाप्राज्ञ शुक ज्ञाननिधे मुने। प्रष्टव्यं तु त्वया पृष्टं रहस्यं वेदगर्भितम्॥
भगवान् शिव ने कहा— हे ज्ञाननिधि मुनि शुकदेव! तुम निश्चय ही महान् प्रज्ञावान् हो। तुमने वेदों के गूढ़ रहस्यों के व्यावहारिक स्वरूप के विषय में प्रश्न किया है।
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