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शिवभारतम् • अध्याय 9 • श्लोक 5
शक्रप्रस्थस्य शक्रेण विरुद्धोऽयमभूद्यदा। महाराजममुं भेजुर्महाराष्ट्रनृपास्तदा।। घाण्टिकाः काण्टिकास्तद्वगोकपाटाक्ष कांकटाः। तोमरा चाहुबाणाच महिताच महाद्रिकाः ।। खराटाः पाण्डरास्तद्वद्व्याघ्रघोरफटादयः। तदा शाहनरेन्द्रेण पृतनापतयः कृताः ।।
जब शहाजीराजे को दिल्ली के बादशाह के विरुद्ध हुआ देखा तब घाटगे, कांटे, ठोमरे, चव्हाण, मोहिते, महाडीक, खराटे, पांढरे, वाघ, घोरपड़े आदि महाराष्ट्रीयन राजा उसको आकर मिलें और तब शहाजीराजे ने उन सबको सेनापति बना दिया।
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