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शिवभारतम् • अध्याय 9 • श्लोक 32
ववृधे चाधिक कोषस्तोषेण सह नित्यशः । प्रतापः पप्रथेऽत्यर्थं प्रभावश्च दिने दिने।।
उसके सन्तोष के साथ साथ उसका क्रोध भी प्रतिदिन अत्यधिक बढ़ने लगा एवं उसके साथ प्रताप एवं प्रभाव भी प्रतिदिन अतिशय वृद्धि को प्राप्त होने लगे।
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