स तु शम्भोः कनीयांसं गरीयांसं गुणश्रिया।
बहु मेने महाराजः शिवशर्माणमात्मजम्।।
संभाजी से आयु में छोटे किंतु गुणों में बड़े अपने पुत्र शिवाजी से शहाजीराजे अत्यंत प्रेम करते थे।
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