हलिना हरिणा चापि वसुदेवो यथान्वहम्।
व्यराजत तथा शाहः शम्भुना च शिवेन च।।
जैसे बलराम और श्रीकृष्ण के संयोग से वसुदेव प्रतिदिन सुशोभित होता था वैसे ही शिवाजी और संभाजी के संयोग से शहाजी सुशोभित हो रहा था।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।