कृत्वाऽथ वीरसंहारकारियुद्धमहर्दिवम्। युद्धशौण्डात् किम्पगौण्डात् गृहीतं सुमनोहरम् ।।
रणदूलहखानेन पारिबर्हमिवार्पितम्। सोऽध्यास्त विजयी राजा बिंगरुळाभिधं पुरम्।।
फिर रात दिन वीरों का संहार करने वाले शाहजी ने युद्ध करके युद्ध निपुण किपगौंडा के पास से अतिशय रमणीय बेंगलुरु नाम का शहर छिन लिया। रणदुल्लाखान ने भी शाहजी को पारितोषिक के रूप में वह नगर दे दिया और फिर उसी जगह वह विजय राजा रहने लगा।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।