ततो बिन्दुपुराधीशं वीरभद्रं महौजसम् । वृषपत्तनपालं च प्रसिद्ध केङ्गनायकम् ।।
कावेरीपत्तनपति जगद्देव महाभुजम् । श्रीरङ्गपत्तनेन्द्र च क्रूरं कण्ठीरवाभिधम्।।
तञ्जापुरप्रभु चापि वीरं विजयराघवम्। तथा तञ्जीपरिवृढं प्रौढं वेङ्कटनायकम्।।
त्रिमल्ल्नायकाद्धं च मधुरानाथमुद्धतम्। पीलुगण्डाखण्डलं च विकटं वेंकटाह्वयम् ।।
धीरं श्रीरङ्गराजं च विद्यानगरनायकम्। प्रसिद्धं तम्मगौडं च हंसकूटपुरेश्वरम् ।।
वशीकृत्य प्रतापेन तथान्यानपि पार्थिवान्। शाहः सन्तोषयामास सेनान्यं रणदूलहम् ।।
बिंदुपुर के राजा महा तेजस्वी वीरभद्र, वृषपत्तन का राजा प्रसिद्ध केंग नाइक, कावेरी पत्तन का राजा महाबाहु जगदेव, श्रीरंगपट्टन का राजा क्रूर कंठीरव, तंजावर का राजा वौर विजयराघव, तंजी का राजा प्रौढ़ वेंकटनायक, मदुरई का राजा घमंडी त्रिमलनायक, पीलूगंडा का राजा उनमुक्त वेंकटप्पा, विद्यानगर का राजा जिद्दी श्रीरंगराजा, हंसकूट का राजा प्रसिद्ध तम्मगौड़ा इनको और अन्य राजाओं को शाहजी ने अपने पराक्रम से अधीन करके सेनापति रणदुल्लाखान को संतुष्ट किया।
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