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शिवभारतम् • अध्याय 9 • श्लोक 15
पूर्वमस्यैवावलम्बादिभरामः पिता मम। विध्वस्तारातिरध्यास्त निर्विशङ्कः स्वमानसम् ।। सहसावमतः सोऽयं मतिमन्दतया मया। मामुपेक्ष्य गतो मानादिभरामादनन्तरम् ।। महामानी महाबाहुरसौ शाहमहीपतिः । कृत्वा मदधिकं स्नेहमिभरामेण वर्धितः ॥
पहले मेरे पिता इब्राहिम शाह इसकी सहायता से ही शत्रुओं का विध्वंस करके मन से निश्चिंत होकर रहते थे। फिर उनकी मृत्यु के बाद मेरी मूर्खता के कारण मैंने उसका अपमान किया जिसके कारण वह अभिमानी शाहजी मुझे छोड़कर चला गया। इब्राहिम शाह ने इस स्वाभिमानी एवं पराक्रमी शाहजी पर मेरे से अधिक प्रेम करके उसका पालन पोषण किया था।
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