पहले मेरे पिता इब्राहिम शाह इसकी सहायता से ही शत्रुओं का विध्वंस करके मन से निश्चिंत होकर रहते थे। फिर उनकी मृत्यु के बाद मेरी मूर्खता के कारण मैंने उसका अपमान किया जिसके कारण वह अभिमानी शाहजी मुझे छोड़कर चला गया। इब्राहिम शाह ने इस स्वाभिमानी एवं पराक्रमी शाहजी पर मेरे से अधिक प्रेम करके उसका पालन पोषण किया था।
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