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शिवभारतम् • अध्याय 9 • श्लोक 1
कवीन्द्र उवाच- अथ देवगिरि प्राप्य दिल्लीन्द्रे मुदितात्मनि। दुर्मदे महमूदे च सन्नसैन्ये विषादिनि।।
कवींद्र बोलें - उसके बाद देवगिरी प्राप्त हो जाने से दिल्ली के बादशाह को आनंद हुआ तथा उन्मुक्त महमूद को अपनी सेना के पराजित होने से दुःख हुआ।
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