न कालेन विना भान्ति शशांकशुचिभास्कराः ।
न कालेन विना वृद्धिमवृद्धिं चैति सागरः ।।
काल के बिना अग्नि चंद्र एवं सूर्य चमकते नहीं है, काल के 'बिना समुद्र ज्वारभाटे को भी प्राप्त नहीं होता है,
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