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शिवभारतम् • अध्याय 8 • श्लोक 62
प्रवृत्तिव निवृत्तिव स्वातन्त्र्यं परतन्त्रता । समृद्धिरसमृद्धिच जायन्ते कालपर्ययात् ।।
प्रवृत्ति या निवृत्ति, स्वतंत्रता या परतंत्रता, समृद्धि या निर्धनता ये सब काल की विपरितता एवं अनुकूलता से उत्पन्न होते हैं।
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