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शिवभारतम् • अध्याय 8 • श्लोक 55
आहाराभावतोऽत्यर्थ हाहाभूताः परस्परम् । पशून्वे पशवो जक्षुर्मानुषा अपि मानुषान् ।।
खाने को कुछ न मिलने के कारण आकस्मिक हाहाकार मच गया और परस्पर पशु पशुओं को एवं मनुष्य मनुष्यों को खाने लगे।
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