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शिवभारतम् • अध्याय 8 • श्लोक 54
प्रस्थमात्राणि रत्नानि विनिमय्य धनीजनः । कथञ्वन समादत्त कुलत्थान्प्रस्थसम्मितान् ।।
धनाढ्य लोग प्रस्थमात्र रत्नों को देकर बड़े प्रयत्न से प्रस्थमात्र कुलत्थी प्राप्त करते थे।
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