मनीषिण उचुः-
यस्याशीतिसहस्राणि तुरगाणां तरस्विनाम् ।
अशीतिरङ्गिदुर्गाणां चतुर्भिरधिका पुनः ॥
पंडित बोले - जिसके पास अस्सी हजार गतिमान घोड़े, चौरासी गिरीदुर्ग एवं जिसके पास अनेक स्थलदुर्ग एवं जलदुर्ग थे,
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