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शिवभारतम् • अध्याय 8 • श्लोक 4
कवीन्द्र उवाच - सुधामिवातिमाधुर्यवती पुण्यवतीमिमाम् । कथां शाहनरेन्द्रस्य श्रृणुत द्विजसत्तमाः ॥
कवींद्र बोलें - अरे द्विजश्रेष्तों! यह अमृत के समान अत्यंत मधुर एवं पवित्र इस शहाजीराजे की कथा का श्रवण करो।
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