स्वयं निजामशाहोऽपि धारागिरिशिरस्थितः ।
तदा ताभ्यामपि द्वाभ्यामनीकाभ्यामयुध्यत ।।
स्वयं निजामशाह भी दौलताबाद किले के माथे पर स्थित होकर उन दोनों सेनाओं के साथ लड़ने लगा।
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