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शिवभारतम् • अध्याय 8 • श्लोक 31
यथा मेरोर्विपर्यासः पात्तो भानुमतो यथा । यथा हान्तः कृतान्तस्य दाहः पत्युरपां पथा ।।
मेरू पर्वत का उल्टा हो जाना या सूर्य का नीचे गिर जाना या यमराज का अंत हो जाना या फिर वरुणदेव का जल जाना जैसा अहितकर है
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