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शिवभारतम् • अध्याय 8 • श्लोक 25
अव्यवस्थितचित्तस्य मत्तस्य मधुनान्वहम् । अवद्यवादिनस्तस्य बत राष्ट्रमहीयत ।।
अव्यवस्थित मन से युक्त एवं प्रतिदिन दारू पीने से उनमुक्त होकर निंदनीय भाषण करने वाले उस निजामशाह का राज्य नष्ट हो रहा था।
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