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शिवभारतम् • अध्याय 8 • श्लोक 22
कवीन्द्र उवाच:- अथ देवान्निजामस्य विषयाविष्टचेतसः । हन्त दुर्मन्त्रिणो योगाज्जज्ञे मतिविपर्ययः ॥
कवींद्र बोलें - भाग्यवश विषयों में आसक्त हुए निजामशाह की बुद्धि को दुष्ट मंत्रियों ने मिलकर घूमा दिया।
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