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शिवभारतम् • अध्याय 7 • श्लोक 37
यः श्रीमान् करुणानिधिः सुमनसामाधारभूतः स्वयम्, संजातः किल शाहभूपभवने हर्तुं धरित्रीभयम्। वेदांतैः पठितः पुराणपुरुषः ख्यातः पुराणेषु यस्तं प्राप्य श्रियमाबभार महतीं बाल्याभिधानं वयः ।। इत्यनुपुराणे कवीन्द्रपरमानन्दविरचिते शिशुलीलावर्णनं नाम सप्तमोऽध्यायः ।।
जो श्रीमान दया के सागर, देवों के आधारभूत, वेदों में वर्णित, पुराणों में विख्यात है ऐसे भगवान विष्णु ने पृथ्वी के भय को हरण करने के लिए शहाजीराजे के घर पर स्वयं अवत्तार लिया और उनको बालपन की शोभा के प्राप्त होने से वे अत्यधिक सुशोभित हो लगे।
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