जो श्रीमान दया के सागर, देवों के आधारभूत, वेदों में वर्णित, पुराणों में विख्यात है ऐसे भगवान विष्णु ने पृथ्वी के भय को हरण करने के लिए शहाजीराजे के घर पर स्वयं अवत्तार लिया और उनको बालपन की शोभा के प्राप्त होने से वे अत्यधिक सुशोभित हो लगे।
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