तत्तद् खेलावसक्तात्मा स आत्मा जवतः परः।
समाहूतो जनन्यापि व्यधाहूरमपाक्रमम् ।।
उन-उन खेलों में आसक्त वह श्रेष्ठ संसार की आत्मा, मां के बुलाने पर भी दूर भाग जाती थी।
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