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शिवभारतम् • अध्याय 7 • श्लोक 33
प्रतिषिद्धोपिधात्रीभिस्तर्जनी तर्जनादिना। शाहसिंहशिशुस्तास्ता शिशुलीला व्यगाहत ।।
दाइयों ने तर्जनी उंगली से डांटकर मना करने पर भी वह शहाजी का पुत्र उस उसकी बाललीला में नकल करता था।
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