दृष्टो हरति यस्तूर्ण जन्मिनां जननभ्रमम्।
अभ्रामयदहोदारुभ्रमरं स कदाचन ।।
जिसके दर्शन करते ही प्राणियों को जन्म मरण के बंधन से शीघ्र मुक्ति मिल जाती है। अहो! कभी उसने स्वयं लकड़ी से निर्मित भौर को घूमाया था।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।