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शिवभारतम् • अध्याय 7 • श्लोक 28
निलीनः सदानः कोणे दृङनिमीलनकेलिषु। अन्विष्य सखिभिः स्पृष्टो सहति स्म कदाचन ।।
कभी लुकाछिपी का खेल खेलते समय वह घर के कोने में छिपकर बैठ जाता तो उसके मित्र उसको ढूंढकर जब स्पर्श करते थे तो वह हंसता था।
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