स एष किल कुर्वाणः शिशुश्शार्दूळ शाब्दितम्।
पार्श्ववर्ती स्नेहपात्रीमपिधात्रीमभीषयत् ।।
वह समीपवर्ती बालक एकदम बाघ जैसी गरजना करके अपने से स्नेह करने वाली दाइयों को भी डराता था।
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